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Thursday, May 3, 2018

देशी संगीत : परिभाषा

प्राचीनकाल में संगीतज्ञों ने शाश्त्रीय संगीत को दो विभागों में बाँट दिया-
१.मार्गी संगीत
२. देशी संगीत या गान

२.देशी संगीत या गान  -
कालांतर में यह अनुभव किया गया कि ईश्वर-प्राप्ति के अतिरिक्त संगीत में मनोरंजन करने की सीमाहीन शक्ति है. तभी से मार्गी संगीत के अलावा संगीत का दूसरा रूप अर्थात देशी संगीत प्रचार में आया. देशी संगीत का उद्देश्य जन-मन रंजन है. इसमें लोक-रूचि और देश-काल के अनुसार कई परिवर्तन भी हुए हैं. और निरंतर होते रहेंगे. इसके नियम मार्गी संगीत की तरह कड़े नहीं है, और इसीलिए इसमें स्वतंत्रता भी अधिक है. मार्गी संगीत अब प्रचार में नहीं हैं.

संपूर्ण भारत में आजकल देशी संगीत का प्रचार है. भारत में देशी संगीत की दो पद्धतियाँ प्रचलित हैं-
१. हिन्दुस्तानी संगीत अथवा उत्तरी भारतीय संगीत.
२. कर्णाटक संगीत अथवा दक्षिणी भारतीय संगीत.

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